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रेल नेटवर्क में बड़ा विस्तार: 4 राज्यों में 3 रेलवे प्रोजेक्ट को मिली हरी झंडी, 8 जिलों की बदल जाएगी तस्वीर!

Edited By: Shivendra Singh Published : Feb 24, 2026 05:13 pm IST, Updated : Feb 24, 2026 06:43 pm IST

देश में रेल इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने की दिशा में केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। कैबिनेट ने करीब ₹9,072 करोड़ लागत वाली तीन अहम रेलवे परियोजनाओं को मंजूरी दे दी है। इन प्रोजेक्ट्स से 4 राज्यों के 8 जिलों में कनेक्टिविटी और विकास की रफ्तार तेज होने की उम्मीद है।

तीन नई रेलवे...- India TV Paisa
Photo:INDIAN RAILWAYS तीन नई रेलवे परियोजनाओं को कैबिनेट की हरी झंडी

देश में रेल इंफ्रास्ट्रक्चर को नई रफ्तार देने के लिए केंद्र सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की कैबिनेट समिति ने 9,072 करोड़ रुपये की लागत से तीन रेलवे परियोजनाओं को मंजूरी दी है। इन परियोजनाओं से महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, बिहार और झारखंड के 8 जिलों में कनेक्टिविटी मजबूत होगी और करीब 307 किलोमीटर तक भारतीय रेल नेटवर्क का विस्तार होगा।

किन परियोजनाओं को मिली मंजूरी?

सरकार ने गोंदिया-जबलपुर सेक्शन के दोहरीकरण के साथ-साथ पुनारख-किउल और गम्हरिया-चांडिल सेक्शन पर तीसरी और चौथी रेल लाइन बिछाने को हरी झंडी दी है।

  • गोंदिया-जबलपुर डबल लाइन (231 किमी): लगभग 5236 करोड़ रुपये की लागत से यह परियोजना 5 साल में पूरी होगी। यह मार्ग गोंदिया को हावड़ा-मुंबई हाई डेंसिटी नेटवर्क से और जबलपुर को इटारसी-वाराणसी रूट से जोड़ेगा।
  • पुनारख-किउल तीसरी-चौथी लाइन (50 किमी): 2268 करोड़ रुपये की लागत से 3 साल में तैयार होने वाली यह लाइन पटना और लखीसराय जिलों को बेहतर कनेक्टिविटी देगी।
  • गम्हरिया-चांडिल तीसरी-चौथी लाइन (26 किमी): 1168 करोड़ रुपये की इस परियोजना से झारखंड के सरायकेला-खरसावां जिले को लाभ होगा।

5400 से ज्यादा गांवों को मिलेगा फायदा

सरकार के मुताबिक इन मल्टी-ट्रैकिंग परियोजनाओं से लगभग 5407 गांवों को बेहतर रेल संपर्क मिलेगा, जहां करीब 98 लाख की आबादी रहती है। लाइन क्षमता बढ़ने से ट्रेनों की आवाजाही सुगम होगी, देरी कम होगी और परिचालन दक्षता में सुधार आएगा।

पर्यटन और व्यापार को बढ़ावा

इन परियोजनाओं से जबलपुर का कचनार शिव मंदिर, कान्हा नेशनल पार्क, धुआंधार वॉटरफॉल, चांडिल डैम और दलमा वाइल्डलाइफ सेंक्चुरी जैसे प्रमुख पर्यटन स्थलों तक पहुंच आसान होगी। साथ ही यह मार्ग कोयला, स्टील, सीमेंट, खाद, फूड ग्रेन्स और पेट्रोलियम उत्पादों की ढुलाई के लिए भी अहम है। क्षमता बढ़ने से करीब 52 मिलियन टन प्रति वर्ष एक्स्ट्रा माल ढुलाई संभव होगी।

पर्यावरण और रोजगार पर सकारात्मक असर

रेल मंत्रालय का कहना है कि ये परियोजनाएं पीएम-गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान के तहत तैयार की गई हैं। इससे लॉजिस्टिक्स लागत घटेगी, सालाना लगभग 6 करोड़ लीटर तेल आयात कम होगा और 30 करोड़ किलोग्राम कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में कमी आएगी, जो एक करोड़ पेड़ लगाने के बराबर है।

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